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||थी कौन, कहाँ से आई थी||कविता||शीलू अनुरागी||
थी कौन, कहाँ से आई थी थी कौन, कहाँ से आई थी, पूछा नहीं उसका हाल। जिसके अधर मितभाषी थे, पर नैन बहुत वाचाल। हवा के संग में उड़ता था, परचम सा ...
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आज, 29 अप्रैल 2022, को विश्व विद्यालय से घर की तरफ आते हुए जब राजीव चौक से द्वारका की ओर आने वाली ब्लू लाइन मेट्रो में बैठा तो देखा कि मेरे ...
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5. तू प्रेम में मेरे राधा बन जा तू प्रेम में मेरे राधा बन जा, कृष्ण तेरा बन जाऊँ मैं। तू नंद लला की बन बंसी, अधरों से तुझे लगाऊँ मैं। पवनो...
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थी कौन, कहाँ से आई थी थी कौन, कहाँ से आई थी, पूछा नहीं उसका हाल। जिसके अधर मितभाषी थे, पर नैन बहुत वाचाल। हवा के संग में उड़ता था, परचम सा ...

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