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||थी कौन, कहाँ से आई थी||कविता||शीलू अनुरागी||
थी कौन, कहाँ से आई थी थी कौन, कहाँ से आई थी, पूछा नहीं उसका हाल। जिसके अधर मितभाषी थे, पर नैन बहुत वाचाल। हवा के संग में उड़ता था, परचम सा ...
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यूँ तो रोजाना ही न जाने कितनी ही घटनाएँ घटती हैं लेकिन आज सुबह की घटना ने तो मानो दिल को झकझोर कर रख दिया। साथ ही ये कोई सहानुभूतित नहीं स्व...
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आज, 29 अप्रैल 2022, को विश्व विद्यालय से घर की तरफ आते हुए जब राजीव चौक से द्वारका की ओर आने वाली ब्लू लाइन मेट्रो में बैठा तो देखा कि मेरे ...
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विचार कर रहा हूँ आज-कल मैं कुछ ऐसा, व्यापार कर रहा हूँ। हर ग्राहक पर कुछ न कुछ, उधार कर रहा हूँ। तुम पर विचार करने का, विचार क्यों किया? म...

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