मैं डगमगाऊँ तो भी, मुझे थामने न आना!!
बेशक़ तू मुझे देखना, पर सामने न आना!!
क्या बतलाऊँ तेरे बाद मैं कैसा जीवन जीता हूँ कितना और हारना है कितना भला मैं जीता हूँ मेरे सीने में एक समय में दुगना दर्द जो उठता है तेरे नाम...