Saturday, July 25, 2026

भूल गई||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी


 

है उसकी हालत कैसी खस्ता भूल गई है
वो पल पल उसको रहे तरसता भूल गई है
 
वो तेरी मुस्कान थी उसको याद है क्या?
छलक आँख का आँसू कहता भूल गई  
 
जब से सोचा बच्चे को शिक्षित करना है
तब से ही माँ महंगा सस्ता भूल गई है
 
पढ़ने के ख़ातिर इतने पापड़ पड़े बेलने
वो घर पर ही अपना बस्ता भूल गई है
 
आधा जीवन भटक के मुझको लगता है
मंज़िल मेरे कदमों का रस्ता भूल गई है
 
मेरे जीवन का उसने उपहास बना डाला
मैं मर जाऊँगा हँसता-हँसता भूल गई है
 
-शीलू अनुरागी

Friday, July 24, 2026

घर किरायदार का||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी||




अपनी छत पाता नहीं  है सर किराएदार का
हो के भी होता नहीं कोई घर किराएदार का
 
किसी ताश की गड्डी सी हैं शर्तें मकानों में जहाँ
पत्ते सभी मालिक के हैं जोकर किराएदार का
 
चाहे कॉलोनी हो वही चाहे गली भी हो वही
होता नहीं निश्चित मकाँ नंबर किराएदार का
 
नालियाँ बनने लगीं और गलियाँ ऊँची हो गईं
गड्ढे की तरह हो गया तब घर किराएदार का
 
होने  लगी बरसात  ज़ोरों की  अचानक रात में 
नाली के जैसा तब गया घर भर किराएदार का
 
पैसे भी मालिक को दें सौ बात भी सुननी पड़ें
सम्मान जाता है  कहीं तब मर  किराएदार का
 
जब निकलता है कोई घर ढूँढ़ने को शहर में
दर-दर भटकता तब  मुक़द्दर किराएदार का
 
इस मकाँ से उस मकाँ सामान जाए किस तरह
काँपे कलेजा सोच  कर थर-थर किराएदार का 
 
कुछ किराएदार पा लेते हैं मंज़िल  हाँ मगर
ख़्वाब जी  पाता नहीं  है हर किराएदार घर
 
          -शीलू अनुरागी

Wednesday, July 15, 2026

हजार हार मिलीं||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी||




हजार हार मिलीं पर ज़रा सी आस रही
जहाँ जहाँ भी रहा मैं उदासी साथ रही

उसके जाने से मेरे भाव भी खिलाफ़ हुए
दुखों ने जश्न मनाया ख़ुशी उदास रही

कई सागर भी उसे मिलके बुझा पाए नहीं
जो एक कतरा मेरे दिल की प्यास रही

कहूँ तो एक झलक को भी तरसता ही रहा
सोचूँ तो वो हमेशा मेरे आसपास रही

उसकी बकबक भी सुनी है मैंने गंभीरता से
मेरी हर बात ही उसके लिए बकवास रही

मेरा अपमान उसने किया और कराया भी
उसकी दी गालियाँ भी मेरे लिए खास रही

वो जिसके साथ है सुन्दर है पैसे वाला है
नहीं अब मेरी कोई कीमत-ओ-औकात रही

-शीलू अनुरागी


सोलह सिगरेट पीता हूँ||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी

क्या बतलाऊँ तेरे बाद मैं कैसा जीवन जीता हूँ कितना और हारना है कितना भला मैं जीता हूँ मेरे सीने में एक समय में दुगना दर्द जो उठता है तेरे नाम...