हजार हार मिलीं पर ज़रा सी आस रहीजहाँ जहाँ भी रहा मैं उदासी साथ रहीउसके जाने से मेरे भाव भी खिलाफ़ हुएदुखों ने जश्न मनाया ख़ुशी उदास रहीकई सागर भी उसे मिलके बुझा पाए नहींजो एक कतरा मेरे दिल की प्यास रहीकहूँ तो एक झलक को भी तरसता ही रहासोचूँ तो वो हमेशा मेरे आसपास रहीउसकी बकबक भी सुनी है मैंने गंभीरता सेमेरी हर बात ही उसके लिए बकवास रहीमेरा अपमान उसने किया और कराया भीउसकी दी गालियाँ भी मेरे लिए खास रहीवो जिसके साथ है सुन्दर है पैसे वाला हैनहीं अब मेरी कोई कीमत-ओ-औकात रही-शीलू अनुरागी
Wednesday, July 15, 2026
हजार हार मिलीं||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी||
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हजार हार मिलीं||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी||
हजार हार मिलीं पर ज़रा सी आस रही जहाँ जहाँ भी रहा मैं उदासी साथ रही उसके जाने से मेरे भाव भी खिलाफ़ हुए दुखों ने जश्न मनाया ख़ुशी उदास रही कई स...
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