Tuesday, September 21, 2021

शायरी-1

ग़ैरों के सहारे से ऊँचाई, तो बेल चढ़े हैं

हम वो दरख़्त हैं जो अपने दम पे खड़े हैं।

-शीलू अनुरागी


भूल गई||ग़ज़ल||शीलू अनुरागी

  है उसकी हालत कैसी खस्ता भूल गई है वो पल पल उसको रहे तरसता भूल गई है   वो तेरी मुस्कान थी उसको याद है क्या? छलक आँख का आँसू कहता भूल गई    ...